+91 81682 45159 • मां सरस्वती हॉस्पिटल, मथुरा • रोज़ सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक
डॉ. निशांत गुप्ताकान, नाक, गला विशेषज्ञ एवं सर्जन कॉल करें
डॉ. निशांत गुप्ता
डॉ. निशांत गुप्ता एम.बी.बी.एस., एम.एस. (ई.एन.टी.) फ़ेलोशिप — दूरबीन से कान की सर्जरी

मथुरा में कान, नाक, गला (ENT) डॉक्टर —
बिना चीरे दूरबीन से कान की सर्जरी

कान बहना, कम सुनाई देना, टॉन्सिल, साइनस और चक्कर का इलाज — मां सरस्वती हॉस्पिटल, मथुरा–वृंदावन रोड। कान की सर्जरी कान के अपने रास्ते से, न टाँके, न पट्टी, उसी दिन छुट्टी।

अपॉइंटमेंट लें
Address मां सरस्वती हॉस्पिटल मथुरा–वृंदावन रोड, गायत्री तपोभूमि के सामने मथुरा, उत्तर प्रदेश 281003
Timingरोज़ सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तकआने से पहले फ़ोन कर लें

व्हाट्सएप पर आमतौर पर जल्दी जवाब मिलता है

कान की बनावट — बाहरी कान, कान का पर्दा, तीन हड्डियाँ और कोक्लिया

पर्दे या तीन हड्डियों की ख़राबी ऑपरेशन से ठीक होती है। भीतरी कान की कमज़ोरी में मशीन से मदद मिलती है।

Endoscopic Ear Surgery

दूरबीन से कान का ऑपरेशन (Endoscopic Ear Surgery) — बिना चीरा, बिना टाँके

पहले कान के पीछे बड़ा चीरा लगाना पड़ता था। अब पतली दूरबीन कान के अपने रास्ते से अंदर जाती है, इसलिए बाहर कुछ काटना ही नहीं पड़ता।

पुराना तरीक़ा

  • कान के पीछे 4–6 सेमी चीरा
  • टाँके खुलवाने दोबारा आना
  • बाल कटते हैं, पट्टी बँधती है
  • 2–3 दिन अस्पताल में

दूरबीन वाला तरीक़ा

  • कोई चीरा नहीं
  • कोई टाँका नहीं
  • न बाल कटते, न पट्टी
  • ज़्यादातर उसी दिन छुट्टी
Hearing loss

कम सुनाई देना और सुनने की जाँच (Audiometry / PTA)

कान आवाज़ पकड़ता है, समझता दिमाग़ है। सालों तक साफ़ आवाज़ न पहुँचे तो दिमाग़ शब्द पहचानना धीरे-धीरे भूलने लगता है — इसीलिए देर से मशीन लगाने पर लोग कहते हैं "आवाज़ तो आती है, पर बात समझ नहीं आती"।

  • 1पहले जाँच, फिर फ़ैसलासुनने की जाँच से पता चलता है कि कमी पर्दे/हड्डी की है (ऑपरेशन से ठीक) या भीतरी कान की (मशीन से मदद)।
  • 2अकेलापन सबसे बड़ा नुक़सानबार-बार पूछने में शर्म आती है, तो लोग बातचीत से कतराने लगते हैं और घर में चुप रहने लगते हैं।
  • 3चक्कर भी कान से जुड़ा हैकरवट बदलते ही सिर घूमे तो अक्सर वजह भीतरी कान में जमे छोटे कण होते हैं — क्लिनिक में ही कुछ मिनट की प्रक्रिया से बहुत मरीज़ों को आराम मिल जाता है।
मशीन कान को ख़राब नहीं करती। यह सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी है। जितनी जल्दी शुरू करें, फ़ायदा उतना ज़्यादा।
Children

बच्चों में कान और सुनने की समस्या — मथुरा में बाल ENT इलाज

बच्चा बोलना तब सीखता है जब वह सुनता है। सुनाई न दे तो बोली भी रुक जाती है — और बच्चा कभी शिकायत नहीं करता।

नाक के पीछे एडेनॉइड का बढ़ना

एडेनॉइड बढ़ जाए तो नाक बंद रहती है और कान के पर्दे के पीछे पानी भर जाता है।

नाक की तकलीफ़ कान तक पहुँचती है

नाक के पीछे का माँस (एडेनॉइड) बढ़ जाए तो कान की हवा वाली नली दब जाती है। पर्दे के पीछे पानी भर जाता है और बच्चे को सुनाई कम देने लगता है — बिना दर्द के, बिना किसी शिकायत के।

  • 1बुलाने पर जवाब न देनाया टीवी बहुत तेज़ करना। घरवाले इसे अक्सर "ध्यान नहीं देता" समझ लेते हैं।
  • 2बोलने में देरीदो साल तक दो शब्द जोड़कर न बोले तो सुनने की जाँच ज़रूर करा लें।
  • 3मुँह खोलकर सोना, खर्राटेया बार-बार कान बहना और ज़ुकाम रहना।
"बड़ा होकर अपने आप बोलने लगेगा" — यह इंतज़ार सबसे महँगा पड़ता है। जाँच में दर्द नहीं होता, छोटे बच्चों की सोते हुए भी हो जाती है।
Throat & tonsils

टॉन्सिल का इलाज और ऑपरेशन (Tonsillectomy)

हर बार गला ख़राब होने पर ऑपरेशन ज़रूरी नहीं। पहले देखा जाता है कि टॉन्सिल की हालत असल में क्या है।

सामान्य टॉन्सिल, सूजे हुए टॉन्सिल और गले की सूजन की तुलना

बाएँ सामान्य टॉन्सिल, बीच में सूजे हुए टॉन्सिल, दाएँ गले की सूजन।

ऑपरेशन कब सोचा जाता है

  • 1साल में बार-बार गला ख़राबऔर हर बार एंटीबायोटिक लेनी पड़े।
  • 2टॉन्सिल इतने बड़े कि साँस अटकेरात में खर्राटे आएँ या नींद में साँस रुके।
  • 3निगलने में लगातार दिक़्क़तया मुँह से लगातार बदबू आना।
जहाँ दवा से काम बन सकता है, वहाँ दवा ही दी जाती है। बच्चों में बिना ज़रूरत टॉन्सिल कभी नहीं निकाले जाते।
आवाज़ की नली और स्वर तंतु की बनावट

आवाज़ की नली के अंदर स्वर तंतु होते हैं। ज़्यादा बोलने, चिल्लाने या तंबाकू से इन पर गाँठ या सूजन आ सकती है।

Voice

आवाज़ बैठना और गले की दूरबीन जाँच (Laryngoscopy)

दो-चार दिन की बैठी आवाज़ आम बात है। लेकिन तीन हफ़्ते से ज़्यादा आवाज़ भारी रहे, तो उसे टालना नहीं चाहिए। दूरबीन से गला देखकर वजह उसी दिन पता कर ली जाती है।

लगातार बैठी आवाज़, निगलने में तकलीफ़, या गले में गाँठ — इन तीनों में जाँच ज़रूरी है, ख़ासकर अगर आप तंबाकू, गुटखा या शराब लेते हों।
Why here

भरोसा किस बात का

अलग से फ़ेलोशिप दूरबीन से कान की सर्जरी एम.एस. में नहीं सिखाई जाती — इसकी अलग ट्रेनिंग श्रॉफ ई.एन.टी. हॉस्पिटल, बिलासपुर में की।
लिखकर समझाया जाता है ऑपरेशन का कारण, तरीक़ा, ख़तरे और ख़र्च — सब पहले लिखकर दिया जाता है, ताकि घर में सलाह कर सकें।
ज़रूरत न हो तो साफ़ मना जहाँ दवा से काम बन सकता है, वहाँ दवा ही दी जाती है। बिना ज़रूरत ऑपरेशन की सलाह नहीं दी जाती।
पूरी सुविधा एक जगह मां सरस्वती हॉस्पिटल में ओ.पी.डी., सुनने की जाँच और ऑपरेशन थिएटर — सब एक ही छत के नीचे।
About the doctor

डॉ. निशांत गुप्ता — ENT सर्जन, मथुरा

डॉ. निशांत गुप्ता
डॉ. निशांत गुप्ता एम.बी.बी.एस., एम.एस. (ई.एन.टी.)

दूरबीन से कान की सर्जरी एम.एस. की पढ़ाई में नहीं सिखाई जाती — इसके लिए अलग फ़ेलोशिप करनी पड़ती है। वह मैंने श्रॉफ ई.एन.टी. हॉस्पिटल, बिलासपुर में डॉ. अरविंद श्रॉफ के मार्गदर्शन में पूरी की।

क्लिनिक एक सीधे उसूल पर चलता है — ऑपरेशन तभी, जब उससे सचमुच फ़ायदा हो।

  • एम.बी.बी.एस.कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मंगलौर (KMC)
  • एम.एस. — कान, नाक, गला एवं हेड-नेक सर्जरीAIMS, बी.जी. नगर, कर्नाटक
  • फ़ेलोशिप — दूरबीन से कान की सर्जरीश्रॉफ ई.एन.टी. हॉस्पिटल, बिलासपुर (NABH) · दिसंबर 2025 – मई 2026
  • मां सरस्वती हॉस्पिटलमथुरा · हिंदी, ब्रज भाषा और English में बात
फ़ेलोशिप प्रमाणपत्र
फ़ेलोशिप प्रमाणपत्र
डॉ. अरविंद श्रॉफ से प्रमाणपत्र
डॉ. अरविंद श्रॉफ से प्रमाणपत्र
दूरबीन से सर्जरी
ऑपरेशन थिएटर में दूरबीन से सर्जरी
ऑपरेशन थिएटर में टीम
पूरी टीम के साथ

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अगर मैंने आपका इलाज किया है, तो दो लाइन लिख दीजिए — किसी अगले मरीज़ को मदद मिलेगी।

Common questions

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कान का पर्दा अपने आप जुड़ सकता है क्या?

छोटा-सा छेद, जो चोट या इन्फ़ेक्शन से हुआ हो, कई बार कुछ हफ़्तों में अपने आप भर जाता है। लेकिन जो छेद सालों से है और जिससे बार-बार कान बहता है, वह अपने आप नहीं भरता — उसे बंद करने के लिए ऑपरेशन ही करना पड़ता है। जाँच में यह पहली बार में ही पता चल जाता है।

क्या सच में कोई निशान नहीं पड़ेगा?

कान के पीछे वाला बड़ा चीरा — जो पुराने तरीक़े में निशान छोड़ता था — इसमें लगता ही नहीं। देखकर कोई नहीं बता सकता कि आपके कान का ऑपरेशन हुआ है।

एक ईमानदार बात: अगर पर्दे की मरम्मत के लिए झिल्ली कान के आगे से लेनी पड़े, तो वहाँ कुछ मिलीमीटर का एक कट लगता है, जो कान की बनावट में छिप जाता है। जाँच के समय यह आपको पहले ही बता दिया जाएगा।

क्या मेरी सुनने की शक्ति वापस आ जाएगी?

अगर कमी की वजह पर्दे का छेद या सुनने की हड्डियों की ख़राबी है, तो ऑपरेशन से सुनने में साफ़ सुधार होता है — और तीन महीने बाद की जाँच में वह नापकर दिखाया जाता है।

अगर ख़राबी भीतरी कान या नस में है, तो ऑपरेशन से वह वापस नहीं आती; उसके लिए मशीन चाहिए। आपकी रिपोर्ट से यह साफ़ पता चल जाता है।

क्या हियरिंग मशीन लगाने से कान और ख़राब हो जाता है?

नहीं। यह सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी है। सही नाप की मशीन कान को नुक़सान नहीं पहुँचाती। उल्टा, मशीन न लगाने से दिमाग़ तक आवाज़ पहुँचनी बंद हो जाती है और शब्द पहचानने की ताक़त कम होती जाती है।

ऑपरेशन का ख़र्च कितना आएगा?

ख़र्च इस पर निर्भर करता है कि कौन-सा ऑपरेशन है, कितना बड़ा है, और आप कौन-सा कमरा लेते हैं। जाँच के बाद आपको पूरा ख़र्च लिखकर बता दिया जाता है — उसमें सर्जन की फ़ीस, बेहोशी, ओ.टी. और भर्ती सब शामिल होता है, ताकि बाद में कोई हैरानी न हो। बीमा या आयुष्मान कार्ड हो तो वह भी पहले ही देख लिया जाता है।

दर्द कितना होगा, कितने दिन आराम करना पड़ेगा?

ज़्यादातर मरीज़ इसे दर्द नहीं, हल्की तकलीफ़ बताते हैं, जो साधारण दवा से ठीक हो जाती है। दुकान या दफ़्तर का काम आमतौर पर एक हफ़्ते में शुरू हो जाता है। भारी वज़न उठाना, तैरना और ज़ोर से नाक साफ़ करना कुछ हफ़्ते मना रहता है।

क्या रात अस्पताल में रुकना पड़ेगा?

आमतौर पर नहीं। सुबह भर्ती, ऑपरेशन, कुछ घंटे निगरानी, और उसी शाम छुट्टी। अगर शुगर, बीपी या दिल की कोई तकलीफ़ है, तो सुरक्षा के लिए एक रात रुकने की सलाह दी जा सकती है।

पहली बार आते समय क्या साथ लाऊँ?

पुरानी सुनने की रिपोर्ट, कान या नाक का CT/MRI, पहले हुए ऑपरेशन के काग़ज़, और अभी चल रही दवाइयों की सूची। कुछ भी न हो तो भी बेझिझक आइए — जाँच क्लिनिक में ही हो जाती है।

Areas we serve

मथुरा और आसपास से आने वाले मरीज़

क्लिनिक मथुरा–वृंदावन रोड पर है, इसलिए शहर के साथ-साथ आसपास के क़स्बों और गाँवों से भी मरीज़ आसानी से पहुँच जाते हैं।

मथुरा वृंदावन गोवर्धन कोसीकलाँ छाता बरसाना फ़राह बल्देव राया सुरीर नंदगाँव हाथरस आगरा

बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से ऑटो या ई-रिक्शा से सीधे पहुँचा जा सकता है — गायत्री तपोभूमि के सामने उतरना है, जो हर ड्राइवर को पता है।

लोग इस क्लिनिक को इन नामों से भी खोजते हैं

मथुरा में कान का डॉक्टर · मथुरा में नाक का डॉक्टर · मथुरा में गले का डॉक्टर · कान नाक गला विशेषज्ञ मथुरा · ENT specialist in Mathura · ENT surgeon Mathura · कान के पर्दे का ऑपरेशन मथुरा · टॉन्सिल ऑपरेशन मथुरा · सुनने की जाँच मथुरा · बच्चों का ENT डॉक्टर मथुरा · दूरबीन से कान का ऑपरेशन · वर्टिगो का इलाज मथुरा

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हॉस्पिटल मथुरा–वृंदावन रोड पर, गायत्री तपोभूमि के सामने है — यह जगह शहर का हर ऑटो और ई-रिक्शा वाला जानता है। वृंदावन, गोवर्धन, कोसीकलाँ, छाता, हाथरस और आगरा की तरफ़ से भी मरीज़ आते हैं।

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